स्वास्थ्य पर वार, शिक्षा पर प्रहार… देवरघटा में आखिर किसकी सरकार?

 स्वास्थ्य पर वार, शिक्षा पर प्रहार… देवरघटा में आखिर किसकी सरकार?

सक्ति। जिले के डभरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत देवरघटा में संचालित अवैध ईंट भट्टों ने स्थानीय जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। नियमों और पर्यावरणीय प्रावधानों को ताक पर रखकर चल रहे इन भट्टों से उठता धुआं और उड़ती राख अब पूरे क्षेत्र के लिए मुसीबत बन चुकी है। ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है?




सड़कें बनीं धूल का मैदान

भट्टों से निकलने वाली राख और लगातार चलने वाले भारी वाहनों ने मुख्य मार्ग की स्थिति बदतर कर दी है। ट्रैक्टर-ट्रॉली और मालवाहक गाड़ियों की आवाजाही से सड़कें गड्ढों और धूल के गुबार में तब्दील हो चुकी हैं। हर गुजरते वाहन के साथ उड़ती धूल राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं इस समस्या से सबसे ज्यादा जूझ रहे हैं। कई ग्रामीणों ने सांस लेने में दिक्कत, खांसी और आंखों में जलन जैसी शिकायतें बढ़ने की बात कही है।


स्वास्थ्य केंद्र के आसपास प्रदूषण

चिंता का विषय यह भी है कि भट्टों के निकट ही आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित है, जहां ग्रामीण उपचार के लिए पहुंचते हैं। लेकिन स्वास्थ्य लाभ लेने आए मरीजों को धुएं और धूल भरे वातावरण का सामना करना पड़ रहा है। गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग इस प्रदूषण से अधिक प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य सेवाओं के आसपास प्रदूषण नियंत्रण के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं?

बच्चों की पढ़ाई पर भी असर

पास स्थित शिशु मंदिर में अध्ययनरत मासूम बच्चे भी इस प्रदूषित माहौल में पढ़ने को मजबूर हैं। सुबह से दोपहर तक उड़ती धूल उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से बच्चों में श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

क्या प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता से लेगा?

प्रशासन की खामोशी पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यदि इन भट्टों के पास वैध अनुमति है, तो प्रदूषण नियंत्रण और सड़क सुरक्षा के मानकों का पालन क्यों नहीं दिख रहा? और यदि अनुमति नहीं है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

जनता अब पारदर्शी जांच और प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

जनहित का गंभीर प्रश्न

यह मामला केवल अवैध कारोबार का नहीं, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य, बच्चों के भविष्य, सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है।अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं—क्या देवरघटा को धूल और धुएं से राहत मिलेगी, या यह समस्या यूं ही बनी रहेगी?

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