अड़भार–बुन्देली पीडब्ल्यूडी सड़क पर उठे निर्माण गुणवत्ता के गंभीर सवाल, जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई या फिर सब कुछ होगा नजरअंदाज
सक्ती। अड़भार से बुन्देली तक लगभग 3 किलोमीटर लंबी पीडब्ल्यूडी पहुंच मार्ग, जिसका भूमिपूजन अक्टूबर–नवंबर 2025 में भाजपा की विशेष आमंत्रित सदस्य श्रीमती संयोगिता युद्धवीर सिंह जूदेव द्वारा किया गया था, अब पहली ही बरसात में चर्चा का विषय बन गई है।
करीब 4 करोड़ 26 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत इस सड़क का निर्माण फरवरी–मार्च 2026 में पूरा हुआ था। लेकिन मानसून की पहली बारिश के बाद ही बुन्देली भांठापारा स्थित बजरंग बली मंदिर पुल के समीप सड़क धंसने की घटना सामने आई है। इससे स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हो गई है, तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। लोगों का सवाल है कि क्या निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन किया गया था? क्या उपयोग की गई सामग्री गुणवत्ता के अनुरूप थी? और यदि कहीं लापरवाही हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है?
प्रदेश में सुशासन और पारदर्शिता की बात करने वाली सरकार के सामने अब यह मामला एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। जनता की अपेक्षा है कि इस सड़क निर्माण की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सिद्ध होती है, तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग पर टिकी हैं।क्या सड़क धंसने के कारणों की निष्पक्ष जांच होगी?क्या सरकारी धन की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी?या फिर यह मामला भी फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा?

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