सक्ती: वेदांता लिमिटेड छत्तीसगढ़ टर्मिनल पावर प्लांट में कर्मचारियों का धरना, विभिन्न मांगों को लेकर किया प्रदर्शन

 सक्ती: वेदांता लिमिटेड छत्तीसगढ़ टर्मिनल पावर प्लांट में कर्मचारियों का धरना, विभिन्न मांगों को लेकर किया प्रदर्शन



सक्ती जिले के अंतर्गत स्थित Vedanta Limited छत्तीसगढ़ टर्मिनल पावर प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्लांट के मुख्य गेट के बाहर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने प्रबंधन के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखते हुए कार्य व्यवस्था और श्रमिक सुविधाओं में सुधार की मांग की।

धरना प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों का कहना था कि वर्तमान में उनसे 12 घंटे की ड्यूटी कराई जा रही है, जिसे घटाकर 8 घंटे किया जाए, ताकि श्रमिकों को उचित विश्राम मिल सके और कार्य के दौरान उनकी कार्यक्षमता भी बनी रहे। इसके अलावा कर्मचारियों ने प्लांट परिसर के अंदर ही शुद्ध पेयजल और वॉशरूम की समुचित व्यवस्था करने की भी मांग रखी। उनका कहना है कि इतनी बड़ी औद्योगिक इकाई में काम करने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी से कर्मचारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

कर्मचारियों ने यह भी मांग उठाई कि उन्हें हर महीने की 7 तारीख तक नियमित रूप से वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि मजदूरों को आर्थिक समस्याओं का सामना न करना पड़े। साथ ही कर्मचारियों ने एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि प्लांट के अंदर किसी कर्मचारी की कार्य के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक सदस्य को प्लांट में नौकरी प्रदान की जाए, ताकि पीड़ित परिवार का जीवन यापन सुचारु रूप से चल सके।

धरना प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रबंधन के सामने रखा। इस संबंध में Vedanta Limited के अधिकारियों ने कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने के लिए 7 दिनों का समय मांगा है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सभी मांगों पर गंभीरता से चर्चा कर उचित निर्णय लिया जाएगा।

अधिकारियों के आश्वासन के बाद फिलहाल कर्मचारियों ने अपना धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में प्रबंधन कर्मचारियों की मांगों को कितना गंभीरता से लेकर उन्हें पूरा करता है या नहीं। कर्मचारियों ने भी स्पष्ट किया है कि यदि तय समय के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगे फिर से आंदोलन किया जा सकता है।

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